शेयर का प्राइस कम और ज़्यादा कैसे होता है?
शेयर का दाम किसी कंपनी की दुकान के “मांग और आपूर्ति” (demand & supply) पर टिका होता है।
1. Demand & Supply
- अगर ज़्यादा लोग शेयर खरीदना चाहते हैं (demand ↑) और बेचने वाले कम हैं → प्राइस बढ़ेगा।
- अगर ज़्यादा लोग शेयर बेचना चाहते हैं (supply ↑) और खरीदने वाले कम हैं → प्राइस गिरेगा।
उदाहरण:
मान लीजिए एक मैच का टिकट है। अगर 100 लोग टिकट खरीदना चाहते हैं लेकिन टिकट सिर्फ 50 हैं, तो कीमत अपने आप बढ़ जाएगी। यही खेल शेयर मार्केट में होता है।
2. Company Performance
- अगर कंपनी का प्रॉफिट बढ़ता है या अच्छे रिजल्ट आते हैं → निवेशकों को भरोसा होता है → शेयर की डिमांड बढ़ती है → प्राइस ऊपर।
- अगर कंपनी का घाटा बढ़ता है या खराब खबर आती है → लोग बेचने लगते हैं → प्राइस नीचे।
3. News & Sentiment
- पॉजिटिव न्यूज़ (जैसे बड़ा ऑर्डर मिला, नया प्रोडक्ट लॉन्च, अच्छे रिजल्ट) → प्राइस बढ़ा सकती है।
- नेगेटिव न्यूज़ (जैसे केस, रेग्युलेशन, स्कैम, मैनेजमेंट प्रॉब्लम) → प्राइस गिरा सकती है।
4. Market and economic situation
- अगर देश की इकोनॉमी मजबूत है, जीडीपी ग्रोथ अच्छी है, तो शेयर प्राइस ऊपर जाते हैं।
- मंदी, युद्ध या महंगाई बढ़ने पर प्राइस नीचे आ सकते हैं।
5. Investor Psychology
कभी-कभी प्राइस सिर्फ भावनाओं की वजह से भी ऊपर-नीचे होता है।
- लोग डर में बेच देते हैं → प्राइस गिरता है।
- लोग लालच में खरीदते हैं → प्राइस चढ़ता है।
Simple conclusion
👉 शेयर का प्राइस हमेशा मांग और आपूर्ति के हिसाब से बदलता है।
👉 इस पर असर डालने वाले कारण हैं – कंपनी का रिजल्ट, न्यूज़, इकोनॉमी, और निवेशकों की सोच।